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Haryana: “काम नहीं तो वेतन नहीं” नीति पर बवाल: मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी की सरकार के फैसले का कर्मचारियों और विपक्ष ने किया विरोध।

April 21, 2025By Short Daily News

मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी के नेतृत्व वाली Haryana सरकार के एक फैसले का विरोध शुरू हो गया है। सरकार के काम नहीं तो वेतन नहीं के कदम की कर्मचारियों ने तीखी आलोचना की है। 16 अप्रैल को घोषित इस निर्णय की विपक्षी नेताओं और कर्मचारी यूनियनों ने कड़ी आलोचना की है, जिन्होंने भाजपा सरकार पर अपनी ‘कर्मचारी समर्थक’ छवि को धोखा देने का आरोप लगाया है।

विशेष रूप से तब जब बात कम वेतन वाले संविदा कर्मचारियों की हो, जो कर्मचारियों की कमी के बीच विभिन्न विभागों में महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां संभाल रहे हैं।

यहां पढ़िए क्या है सरकार का ऑर्डर…

Haryana सरकार ने फैसला लिया है कि 20 जुलाई से 3 अगस्त 2024 तक हड़ताल में भाग लेने वाले किसी भी बोर्ड या निगम में कार्यरत संविदा कर्मचारियों की नौकरी की सुरक्षा बरकरार रहेगी। मानव संसाधन विभाग ने निर्देश जारी कर स्पष्ट किया है कि हड़ताल के दिनों के लिए कोई पारिश्रमिक तो नहीं दिया जाएगा, लेकिन इस आधार पर इन कर्मचारियों की कार्यकाल की सुरक्षा पर प्रतिकूल प्रभाव नहीं पड़ेगा।

सरकार ने कर्मचारियों में सख्त मैसेज दिया

सरकार का कहना है कि यह कार्रवाई नियमों के अनुरूप थी और इसका उद्देश्य जनता को होने वाली असुविधा के खिलाफ एक कड़ा संदेश भेजना था, आलोचकों का तर्क है कि कर्मचारियों को उनकी सेवाओं के नियमितीकरण की लंबे समय से लंबित मांग के लिए अनुचित रूप से दंडित किया गया।एक कर्मचारी नेता ने कहा, ये कर्मचारी बिना किसी नौकरी की सुरक्षा के काम करते हैं और उनके पास यूनियन का समर्थन भी नहीं है, जबकि उनके नियमित समकक्षों के पास यह सुविधा नहीं है। उन्हें कड़ी सजा के लिए चुना गया है।

क्या बोले कर्मचारी नेता ?

अखिल भारतीय राज्य सरकार कर्मचारी महासंघ के अध्यक्ष सुभाष लांबा ने इस कार्रवाई को अनुचित बताया है। राज्य सरकार की तर्कहीन नीतियों के कारण उन्हें हड़ताल करने के लिए मजबूर होना पड़ा। यह भाजपा सरकार के ‘कर्मचारी हितैषी’ दावों के विपरीत है। सरकार उन्हें ‘छुट्टी पर जाने’ के रूप में मान सकती थी। लांबा ने सद्भावना के तौर पर इस फैसले को वापस लिए जाने की मांग की।

जेटली बोले- सरकार कर्मचारी हितैषी।

मुख्यमंत्री के मीडिया सलाहकार राजीव जेटली ने जोर देकर कहा कि भाजपा कर्मचारी कल्याण के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने पिछले साल के अंत में पारित Haryana संविदा कर्मचारी (सेवा की सुरक्षा) विधेयक, 2024 का हवाला दिया। उन्होंने कहा, यह सुनिश्चित करता है कि Haryana कौशल रोजगार निगम (HKRNL) के माध्यम से नियुक्त किए गए संविदा, तदर्थ या आउटसोर्स कर्मचारी अब सेवानिवृत्ति की आयु तक काम कर सकते हैं। यह देश में अपनी तरह की पहली पहल है।