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पुनर सुरजीत अकाली दल ने ‘वारिस पंजाब दे’ के साथ गठबंधन का किया ऐलान, पंथक एकता मजबूत करने पर जोर

July 21, 2026By Short Daily News

पंजाब की राजनीति में पंथक एकता की दिशा में एक अहम कदम उठाते हुए पुनर सुरजीत अकाली दल के पंथक एकता समर्थक नेताओं ने अकाली दल “वारिस पंजाब दे” को बिना किसी शर्त पूर्ण समर्थन देने और गठबंधन करने का ऐलान किया। चंडीगढ़ में आयोजित पंथक बैठक में बापू तरसेम सिंह, मनप्रीत सिंह इयाली, फरीदकोट से सांसद सरबजीत सिंह खालसा, जत्थेदार इकबाल सिंह झूंदां और जत्थेदार संता सिंह उमैदपुरी समेत कई वरिष्ठ नेता मौजूद रहे। नेताओं ने कहा कि लंबे समय से पंजाब और पंथ से जुड़े मुद्दों पर प्रभावी नेतृत्व की कमी रही है, जिसे अब पंथक एकता के जरिए दूर करने की कोशिश की जाएगी। उन्होंने कहा कि सभी पंजाब और पंथ हितैषी संगठनों को इस अभियान का हिस्सा बनकर एकजुट होना चाहिए।

बैठक के दौरान नेताओं ने दावा किया कि लोकसभा चुनावों और श्री अकाल तख्त साहिब के निर्देशों के बाद धार्मिक क्षेत्र में बीबी सतवंत कौर और राजनीतिक क्षेत्र में भाई अमृतपाल सिंह खालसा को व्यापक स्वीकार्यता मिली है। उनका कहना था कि गुरु साहिबानों के मीरी-पीरी सिद्धांत के अनुसार धार्मिक और राजनीतिक नेतृत्व को एकजुट कर पंजाब और पंथ के हितों की मजबूती से पैरवी की जाएगी। उन्होंने आरोप लगाया कि पिछले वर्षों में अकाली राजनीति सत्ता तक सीमित होकर रह गई, जिससे पंजाब के कई अहम मुद्दे पीछे छूट गए।

बापू तरसेम सिंह ने इस पहल का स्वागत करते हुए कहा कि इस गठबंधन को सफल बनाने के लिए हरसंभव प्रयास किए जाएंगे। उन्होंने कहा कि ‘वारिस पंजाब दे’ का उद्देश्य नशा मुक्त युवा तैयार करना, सामाजिक भाईचारा मजबूत करना, पंजाब के विकास को गति देना और एक खुशहाल राज्य का निर्माण करना है। वहीं मनप्रीत सिंह इयाली ने पंजाब के लोगों, खासकर युवाओं से एकजुट होकर राज्य के भविष्य के लिए काम करने की अपील की। उन्होंने कहा कि पंजाब के अधिकारों, चंडीगढ़, नदी जल विवाद, बंदी सिखों की रिहाई और अन्य लंबित मुद्दों को आने वाले समय में और मजबूती से उठाया जाएगा।

फरीदकोट से सांसद सरबजीत सिंह खालसा ने कहा कि पंजाब के लोगों ने हमेशा अपने अधिकारों और न्याय के लिए संघर्ष किया है और आगे भी यह संघर्ष जारी रहेगा। उन्होंने कहा कि युवाओं, किसानों, मजदूरों और आम लोगों की समस्याओं को संसद और अन्य लोकतांत्रिक मंचों पर मजबूती से उठाया जाएगा। इस मौके पर पूर्व विधायक, शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (एसजीपीसी) के वर्तमान और पूर्व सदस्य, विभिन्न सामाजिक एवं धार्मिक संगठनों के प्रतिनिधियों सहित बड़ी संख्या में नेता और कार्यकर्ता मौजूद रहे।