Search

BREAKING
महान शहीद ऊधम सिंह के ‘शहीदी दिवस’ पर मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान की ओर से 107 करोड़ रुपए से अधिक के विकास प्रोजेक्ट सुनाम को समर्पित आम आदमी पार्टी सरकार देश के लिए महान बलिदान देने वाले स्वतंत्रता सेनानियों के सपनों को साकार करने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध : मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान पिछले 12 सालों से नफरत, व्हाट्सएप यूनिवर्सिटी के दम पर ‘बांटो और राज करो’ की राजनीति कर रही है भाजपा: मीत हेयर कांग्रेस पूरी तरह से बिखर चुकी है, राजा वड़िंग ‘आप’ के विरुद्ध अफवाहें फैलाने के बजाय अपना घर संभालें: बलतेज पन्नू आप सांसद मालविंदर कंग ने केंद्रीय रेल मंत्री से की मुलाकात, पंजाब के रेलवे इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए सौंपे तीन ज्ञापन पंजाब-चंडीगढ़ में 4 दिनों तक भारी बारिश का अलर्ट, कई जिलों के लिए रेड और ऑरेंज चेतावनी पंजाब सरकार पहली अगस्त से खाटू श्याम, सालासर, वृंदावन और ऋषिकेश के लिए मुफ्त तीर्थ यात्रा करवाएगी: CM भगवंत सिंह मान PM मोदी के खिलाफ कथित आपत्तिजनक टिप्पणी मामले में नोएडा की युवती पर कार्रवाई, FIR दर्ज चीन कृत्रिम सूरज बना रहा है और हमारे प्रधानमंत्री बच्चों पर FIR करवाने में व्यस्त हैं- केजरीवाल मानसिक स्वास्थ्य लीडर दे रहे पंजाब के ‘युद्ध नशेआं विरुद्ध’ अभियान को नई मज़बूती; फेलोज़ के दूसरे बैच के लिए आवेदन अगस्त की शुरुआत में होंगे शुरू

अब शादी के लिए मजबूर नहीं कर सकते माता-पिता, पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट का बड़ा फैसला

June 17, 2026By Short Daily News

पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने व्यक्तिगत स्वतंत्रता और अपनी पसंद से विवाह करने के अधिकार को लेकर एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। अदालत ने स्पष्ट किया है कि कोई भी माता-पिता या रिश्तेदार किसी बालिग व्यक्ति को उसकी इच्छा के विरुद्ध शादी करने के लिए मजबूर नहीं कर सकते।

जस्टिस दीपक गुप्ता ने एक एमबीए छात्रा की याचिका पर सुनवाई करते हुए कहा कि शादी करना है या नहीं, कब करनी है और किससे करनी है, यह पूरी तरह से व्यक्ति का निजी निर्णय है। यह अधिकार भारतीय संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत प्रदत्त जीवन और व्यक्तिगत स्वतंत्रता के अधिकार का हिस्सा है।

याचिकाकर्ता ने अदालत को बताया कि वह नौकरी और उच्च शिक्षा के कारण स्वतंत्र रूप से रह रही है, लेकिन उसके माता-पिता, मामा और अन्य रिश्तेदार उस पर अपनी पसंद के व्यक्ति से विवाह करने का लगातार दबाव बना रहे हैं।

अदालत ने कहा कि विवाह किसी व्यक्ति के जीवन का सबसे महत्वपूर्ण निजी निर्णय होता है और इस मामले में किसी भी प्रकार का बाहरी दबाव या जबरदस्ती स्वीकार नहीं की जा सकती। कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि किसी भी व्यक्ति को उसकी इच्छा के खिलाफ विवाह के बंधन में नहीं बांधा जा सकता।

हाईकोर्ट ने यह भी कहा कि ऐसे मामलों में राज्य की जिम्मेदारी है कि वह नागरिकों के जीवन और व्यक्तिगत स्वतंत्रता की सुरक्षा सुनिश्चित करे।

मामले का निपटारा करते हुए अदालत ने मोहाली के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (एसएसपी) या उनके द्वारा अधिकृत अधिकारी को छात्रा की शिकायत पर विचार करने, खतरे का आकलन करने और यदि उसकी जान या स्वतंत्रता को वास्तविक खतरा हो तो तत्काल सुरक्षा उपलब्ध कराने के निर्देश दिए हैं।

इस फैसले को बालिग व्यक्तियों के अपनी पसंद से जीवनसाथी चुनने और स्वतंत्र रूप से जीवन जीने के संवैधानिक अधिकार को मजबूत करने वाला महत्वपूर्ण निर्णय माना जा रहा है।