Search

BREAKING
• पंजाब ने नशों के विरुद्ध सख्त कानून बनाने के लिए केंद्र को तीन पत्र लिखे, लेकिन भाजपा की केंद्र सरकार ने कोई गंभीरता नहीं दिखाई: हरपाल सिंह चीमा • अमित शाह के पंजाब दौरे से पहले अमन अरोड़ा ने उठाए सवाल, नशा तस्करी और सीमा सुरक्षा पर मांगा जवाब • परविंदर झोटा हत्याकांड की जांच अब CBI करेगी, CM मान का बड़ा ऐलान; परिवार की मांग मानी • अमित शाह को पंजाब को उपदे देने से पहले देश में बढ़ रहे गैंगस्टरवाद, फिरोती और नशा तस्करी पर जवाब दें: हरपाल सिंह चीमा • परविंदर झोटा हत्याकांड में सरकार की पहल, बातचीत के लिए 3 महिला IAS अधिकारियों की टीम गठित • “राम भक्तों की पुकार, चंदा चोरों को सज़ा इस बार”: अमन अरोड़ा ने श्री राम मंदिर चंदा चोरी मामले में प्रधानमंत्री मोदी से कड़ी सज़ा की मांग की • टाइगर श्रॉफ पर हमले को लेकर मालविंदर कंग का केंद्र पर हमला, गैंगस्टरों को संरक्षण देने का लगाया आरोप • अमित शाह के पंजाब दौरे से पहले केजरीवाल का BJP पर तीखा हमला, कानून-व्यवस्था को लेकर उठाए सवाल • संगरूर में भीषण सड़क हादसा, मनरेगा मजदूरों समेत 8 की मौत; CM मान ने किया मुआवजे का ऐलान • अमित शाह पंजाब को बताएं कि मुंद्रा पोर्ट से देश में आने वाले नशे को रोकने के लिए उन्होंने अब तक क्या ठोस कदम उठाए हैं: बलतेज पन्नू

Arvind Kejriwal का बड़ा ऐलान: जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा की अदालत में नहीं होंगे पेश

April 27, 2026By Short Daily News

आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक और दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री Arvind Kejriwal ने दिल्ली हाई कोर्ट की जस्टिस Swarna Kanta Sharma को एक महत्वपूर्ण पत्र लिखकर बड़ा फैसला लिया है। अपने पत्र में केजरीवाल ने स्पष्ट किया कि वह अब न तो व्यक्तिगत रूप से और न ही अपने वकील के माध्यम से उनकी अदालत में पेश होंगे।

केजरीवाल ने पत्र में लिखा कि उन्हें इस अदालत से न्याय मिलने की उम्मीद नहीं रही। उन्होंने कहा कि यह निर्णय उन्होंने अपनी अंतरात्मा की आवाज पर लिया है और अब वह Mahatma Gandhi के सत्याग्रह के रास्ते पर चलने का फैसला कर रहे हैं। साथ ही उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि वह जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा के किसी भी फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में अपील करने का अधिकार सुरक्षित रखते हैं।

गौरतलब है कि दिल्ली हाई कोर्ट ने हाल ही में कथित शराब घोटाले से जुड़े मामले में केजरीवाल की जज बदलने की मांग को खारिज कर दिया था। केजरीवाल का आरोप था कि केस की सुनवाई कर रही जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा द्वारा पक्षपात किया जा रहा है और इसलिए मामले को किसी अन्य बेंच को सौंपा जाना चाहिए।

हालांकि, अदालत ने इन दलीलों को स्वीकार नहीं किया और याचिका को खारिज कर दिया। सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायाधीश की टिप्पणी के बाद यह फैसला लिया गया।

याचिका खारिज होने के बाद केजरीवाल द्वारा लिया गया यह कदम अब राजनीतिक और कानूनी हलकों में चर्चा का विषय बन गया है। अब यह देखना अहम होगा कि आगे इस मामले में क्या कानूनी मोड़ आता है और क्या केजरीवाल इस मुद्दे को सुप्रीम कोर्ट तक ले जाते हैं।