Search

BREAKING
आम आदमी पार्टी सरकार बाबा साहेब Dr. Bhim Rao Ambedkar के दिखाए रास्ते पर चल रही है – एडवोकेट हरपाल सिंह चीमा पंजाब की मंडियों में 28 लाख मीट्रिक टन गेहूं की आमद, 24 लाख मीट्रिक टन से अधिक की खरीद : लाल चंद कटारूचक्क Punjab News: भगवंत मान सरकार का बेअदबी विरोधी बिल राज्यपाल की मंजूरी के साथ कानून बना, कमजोर कानूनों और सियासी संरक्षण के युग का हुआ अंत: हरपाल सिंह चीमा Punjab News: मां की सांसों के लिए जंग: ‘मुख्यमंत्री सेहत योजना बनी बेटे की सबसे बड़ी ताकत Punjab : मुख्यमंत्री सेहत योजना बनी बेटे की सबसे बड़ी ताकत, सरकार ने कराया कैंसर का इलाज बेअदबी पर देश का सबसे सख्त कानून मंजूर…, क्या है जगत जोत श्री गुरु ग्रंथ साहिब सत्कार संशोधन 2026 ? Punjab में बेअदबी के खिलाफ सख्त कानून लागू, राज्यपाल की मंजूरी सुखबीर बादल का ‘मंडी दौरा’ एक ‘राजनीतिक ड्रामा’ निकला, खरीद की सच्चाई अकाली दल के झूठे प्रचार का किया पर्दाफाश: Baljeet Kaur CM भगवंत मान की अगुवाई में पंजाब के बुनियादी ढांचे का कायाकल्प लगातार जारी: Harbhajan Singh ETO ‘युद्ध नशेआं विरुद्ध’ मुहिम ला रही है रंग, 80% सफलता दर के साथ जनता और पुलिस के तालमेल ने तोड़ी तस्करों की कमर: Baltej Pannu

Supreme Court 15 September को सुनाएगा Waqf (Amendment) Act, 2025 पर फैसला

September 14, 2025By Short Daily News

सुप्रीम कोर्ट सोमवार, 15 सितंबर 2025, को Waqf (Amendment) Act, 2025 के लागू होने पर रोक लगाने की याचिका पर अपना फैसला सुनाने जा रहा है। इस कानून के खिलाफ 100 से ज्यादा याचिकाकर्ताओं ने मामला दायर किया है, जिन्होंने इसे मुस्लिम संपत्तियों पर “creeping acquisition” यानी धीरे-धीरे कब्जा करने वाला कानून बताया है।

याचिकाकर्ता और उनके दावे

इस मामले में सबसे पहले कांग्रेस सांसद मोहम्मद जावेद ने याचिका दायर की थी। वह Joint Parliamentary Committee (JPC) के सदस्य भी थे। उन्होंने अदालत में कहा कि यह कानून मुस्लिम समुदाय की धार्मिक स्वतंत्रता और संपत्ति के अधिकार (Article 300A) को प्रभावित करता है।

वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने अदालत में तर्क दिया कि कानून की Sections 3C और 3D problematic हैं। उनका कहना है कि ये sections किसी भी व्यक्ति को waqf की वैधता पर सवाल उठाने और उसकी स्थिति को freeze करने का अधिकार देते हैं। इसके अलावा, कई पुराने और unregistered waqfs इस कानून के तहत invalid हो सकते हैं। वे यह भी कहते हैं कि कानून waqf governing bodies में non-Muslims को शामिल करने की इजाजत देता है।

केंद्र सरकार का रुख

केंद्र सरकार ने Solicitor General तुषार मेहता के माध्यम से कोर्ट में दावा किया कि waqf बनाना और charity करना इस्लाम का essential part नहीं है। उन्होंने कहा कि Articles 25 और 26 के तहत राज्य को धार्मिक संपत्ति और वित्त के मामलों में नियम बनाने का अधिकार है, ताकि transparency और misuse को रोका जा सके। उन्होंने यह भी कहा कि waqfs-by-user केवल legislative policy से statutory recognition पाते थे और यह recognition बदलना भी कानून के तहत संभव है।

सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई

  • मामला अप्रैल 2025 में सुप्रीम कोर्ट पहुंचा, Bill पास होने के तुरंत बाद।
  • Chief Justice B.R. Gavai की बेंच ने मई में तीन दिन लगातार सुनवाई की।
  • अदालत ने मई 20 को कहा कि Parliament का पास किया गया कानून पहले से ही constitutional माना जाता है, इसलिए इसे रोकना rare होगा।

राज्य सरकारों और राजनीतिक दलों की भूमिका

  • केरल सरकार ने अदालत में हस्तक्षेप किया और कहा कि कानून मुस्लिम समुदाय की धार्मिक स्वतंत्रता और संपत्ति अधिकारों को प्रभावित कर सकता है।
  • तमिलनाडु की ruling party DMK ने JPC की impartiality पर सवाल उठाया और कहा कि Bill के deliberation में communal interests dominate कर सकते हैं।

मुख्य विवादित मुद्दे

  1. Act से waqf management में सरकारी control बढ़ सकता है।
  2. Unregistered waqfs invalidate हो सकते हैं।
  3. Waqf governing bodies में non-Muslims को शामिल किया जा सकता है।
  4. Petitioners का दावा: Religious freedom और property rights का उल्लंघन।
  5. सरकार का दावा: Transparency जरूरी और encroachment रोकना कानूनी है।

अगला कदम

सुप्रीम कोर्ट का निर्णय 15 सितंबर 2025 को आएगा।

  • अगर कोर्ट stay देता है: Act लागू नहीं होगा।
  • अगर stay नहीं मिलता: Act के नियम लागू हो जाएंगे और सरकार इसके तहत action ले सकेगी।

यह मामला भारत के minority rights और religious property management से जुड़ा महत्वपूर्ण फैसला माना जा रहा है।