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government की land pooling policy पर भड़के किसान, बोले – ‘पैसे से ज़मीन और पहचान नहीं खरीदी जा सकती’

July 24, 2025By Short Daily News

पंजाब सरकार की लैंड पूलिंग पॉलिसी को लेकर राज्य के कई जिलों, खासकर लुधियाना के गांवों में किसानों का गुस्सा लगातार बढ़ता जा रहा है। किसानों का कहना है कि यह लड़ाई सिर्फ ज़मीन की नहीं बल्कि उनकी पहचान, रोज़गार और विश्वास की भी है।

मुआवज़े की रकम पर सवाल

किसानों ने सरकार द्वारा लगातार बदलते मुआवज़े के आंकड़ों पर भी सवाल खड़े किए हैं। एक किसान नेता ने कहा, “शुरुआत में सरकार ने सालाना 30,000 रुपये प्रति एकड़ किराया देने की बात की थी, फिर यह बढ़ाकर 50,000 और अब 1 लाख रुपये कर दिया गया है। अगर विकास इतना तेज़ होगा, तो फिर इतनी लंबी अवधि के किराए की जरूरत ही क्यों? खुद सरकार को भी शायद पता नहीं कि प्रोजेक्ट कब पूरा होगा।”

कब मिलेगा ‘विकसित ज़मीन’?

दिदार सिंह नामक किसान ने कहा, “हमारी खेती की ज़मीन हर साल हमें आमदनी दे रही है। सरकार ने कहा था कि हमें बदले में विकसित ज़मीन दी जाएगी, लेकिन अभी तक कुछ नहीं मिला। हम अपनी ज़मीन दे दें, और बदले में क्या मिलेगा, वो साफ नहीं है।”

बाज़ार मूल्य से कई गुना कम ऑफर

किसानों का कहना है कि लुधियाना के कई गांवों में जमीन का बाज़ार रेट 4 से 5 करोड़ रुपये प्रति एकड़ है, जबकि सरकार इसका मुकाबला नहीं कर पा रही। “हमारी ज़मीन अगर ली जा रही है, तो उसके बदले की रकम भी वैसी ही होनी चाहिए। लेकिन यहां सरकार खुद ही कन्फ्यूज है। हमें दी जाने वाली developed residential और commercial land की resale भी हमारे लिए एक और बड़ी परेशानी होगी,” एक और किसान ने बताया।

‘सरकार खुद कर्ज़ में डूबी है’

भारतीय किसान यूनियन (उगराहां) के महासचिव सुखदेव सिंह कोकरीकलां ने तीखा सवाल उठाया – “पंजाब सरकार तो पहले से ही भारी कर्ज़ में है। वो हजारों एकड़ की ज़मीन का किराया कहां से देगी? किसे बेवकूफ बना रही है सरकार?”

164 गांवों की ज़मीनें प्रभावित

इस लैंड पूलिंग पॉलिसी के तहत पंजाब के लगभग 164 गांवों की ज़मीनें प्रभावित हो रही हैं। किसानों का साफ कहना है कि यह सिर्फ जमीन देने की बात नहीं है, बल्कि इससे उनकी पूरी ज़िंदगी का ताना-बाना जुड़ा है।

कोकरीकलां ने कहा, “सरकार गांवों की आवाज़ नहीं सुन रही। अब लड़ाई आर-पार की होगी। 30 जुलाई को होने वाली ट्रैक्टर मार्च सरकार को दिखा देगी कि असली पंजाब क्या है – खेत, किसान और उसकी मेहनत।”

लैंड पूलिंग पॉलिसी क्या है?

सरकार की इस पॉलिसी के तहत किसानों से जमीन लेकर उसे विकसित किया जाना है – जिसमें रोड, पार्क, शॉपिंग एरिया और रेजिडेंशियल ब्लॉक शामिल हैं। फिर किसानों को developed plots वापस देने की योजना है। इसके साथ-साथ कुछ समय तक सालाना किराया भी देने की बात हो रही है। लेकिन ये प्रक्रिया कितनी पारदर्शी और भरोसेमंद होगी, यही सबसे बड़ा सवाल है।

किसानों की मांगें:

  • पारदर्शी प्रक्रिया सुनिश्चित की जाए
  • जमीन का असली बाजार मूल्य दिया जाए
  • तय समय सीमा में developed plots दिए जाएं
  • लीज़ के नाम पर किसानों को गुमराह न किया जाए
  • मुआवज़े का विकल्प किसानों की इच्छा से तय हो

पंजाब में जमीन केवल एक संपत्ति नहीं, बल्कि किसान की जान होती है। सरकार की नीतियों को लेकर संदेह, मुआवज़े में असमानता और विकसित ज़मीन की अनिश्चितता ने किसानों को संघर्ष के रास्ते पर ला दिया है। अब देखना होगा कि सरकार इस विरोध के जवाब में कोई समाधान निकालती है या नहीं।