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मुख्यमंत्री सेहत योजना’ ने 10 प्रमुख प्रक्रियाओं के तहत 2.44 लाख मरीज़ों को दिया कैशलेस उपचार, ₹316.50 करोड़ से अधिक ख़र्च

August 10, 2026By Short Daily News

गंभीर बीमारी केवल मरीज़ के स्वास्थ्य की परीक्षा नहीं लेती, बल्कि अक्सर पूरे परिवार की आर्थिक स्थिति को भी झकझोर देती है। भगवंत मान सरकार की मुख्यमंत्री सेहत योजना पंजाब में इस स्थिति को लगातार बदल रही है और महँगे चिकित्सा उपचार की लागत को परिवारों की चिंता से बाहर करने की दिशा में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभा रही है।

 

आंकड़े खुद पूरी कहानी बयाँ करते हैं। योजना के तहत सबसे अधिक उपयोग की जाने वाली प्रमुख 10 चिकित्सा प्रक्रियाओं में ही अब तक 2,44,468 कैशलेस उपचार उपलब्ध करवाए जा चुके हैं, जिन पर ₹316.50 करोड़ से अधिक का ख़र्च किया गया है। सप्ताह में कई बार डायलिसिस की आवश्यकता वाले मरीज़ों से लेकर हृदय की सर्जरी, घुटना प्रत्यारोपण (नी रिप्लेसमेंट) या आपातकालीन सीज़ेरियन डिलीवरी करवाने वाली महिलाओं तक—योजना ऐसे उपचारों को कवर कर रही है, जिनका ख़र्च कई परिवारों के लिए वहन करना मुश्किल हो सकता था।

 

यह पैटर्न कोई संयोग नहीं है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के अनुसार, दुनियाभर में स्वास्थ्य प्रणालियाँ हृदय रोग, डायबिटीज़ और किडनी संबंधी विकारों जैसी दीर्घकालिक बीमारियों में तेज़ वृद्धि देख रही हैं। पंजाब भी इससे अलग नहीं है। योजना के तहत डायलिसिस, हृदय उपचार और जोड़ प्रत्यारोपण (जॉइंट रिप्लेसमेंट)की बढ़ती माँग ऐसे स्वास्थ्य तंत्र को दर्शाती है, जो ऐसी बीमारियों की बढ़ती चुनौती का सामना कर रहा है, जो एक बार अस्पताल जाने से समाप्त नहीं होतीं; बल्कि इनके लिए निरंतर, विशेषज्ञ और अक्सर महँगे उपचार की आवश्यकता होती है।

 

राज्य स्वास्थ्य एजेंसी (SHA), पंजाब, के आंकड़ों के अनुसार, क्रॉनिक हीमोडायलिसिस, योजना के तहत सबसे अधिक ली जाने वाली प्रक्रिया बनी हुई है। कुल 1,87,656 डायलिसिस सत्र, जिनकी लागत ₹30.65 करोड़ से अधिक है, उपलब्ध करवाए जा चुके हैं, जिससे यह सुनिश्चित किया गया है कि क्रॉनिक किडनी रोग से जूझ रहे मरीज़ हर बार अस्पताल जाने के लिए पैसे जुटाने की लगातार चिंता किए बिना अपना उपचार जारी रख सकें।

 

योजना के तहत 17,698 लैप्रोस्कोपिक गॉल ब्लैडर सर्जरी भी की गई हैं, जो दूसरी सबसे अधिक करवाई जाने वाली प्रक्रिया है। इसके बाद 10,751 टोटल नी रिप्लेसमेंट सर्जरी हुई हैं, जिससे हज़ारों बुज़ुर्ग मरीज़ों को दोबारा चलने-फिरने और आत्मनिर्भरता हासिल करने में मदद मिली है। इसके अलावा, 9,317 महिलाओं को कैशलेस सीज़ेरियन डिलीवरी की सुविधा मिली, जिससे परिवारों पर उस महत्त्वपूर्ण समय में पड़ने वाला आर्थिक दबाव कम हुआ, जब उन्हें सबसे अधिक सुरक्षा और सहायता की आवश्यकता होती है।

 

हृदय उपचार भी योजना का एक महत्त्वपूर्ण स्तंभ बनकर उभरा है। कुल 8,734 मरीज़ों की पर्क्यूटेनियस ट्रांसल्यूमिनल कोरोनरी एंजियोप्लास्टी (PTCA) के साथ डायग्नोस्टिक एंजियोग्राफी की गई, जबकि 554 मरीज़ों की कोरोनरी आर्टरी बाईपास ग्राफ्टिंग (CABG) की गई, जिससे यह सुनिश्चित करने में मदद मिली कि लागत के कारण जीवनरक्षक हृदय उपचार में देरी न हो।

 

योजना के तहत किडनी स्टोन के उपचार के लिए 5,770 पर्क्यूटेनियस नेफ्रोलिथोटॉमी (PCNL) प्रक्रियाएँ, 2,247 लोअर यूरेटर सर्जरी, 911 सीमेंटलेस टोटल हिप रिप्लेसमेंट सर्जरी और 830 रेडिकल सर्जिकल प्रक्रियाएँ भी कवर की गई हैं। यह विभिन्न चिकित्सा विशेषज्ञताओं में उन्नत और महँगे उपचार उपलब्ध करवाने की योजना की क्षमता को दर्शाता है।

 

स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री डॉ. बलबीर सिंह ने कहा, “किसी भी स्वास्थ्य कार्यक्रम की वास्तविक सफलता का पैमाना कागज़ों पर दर्ज लाभार्थियों की संख्या नहीं, बल्कि उन परिवारों की संख्या है, जिन्हें आर्थिक संकट में पड़े बिना समय पर इलाज मिलता है। किसी स्वास्थ्य योजना की सफलता इसके द्वारा बदली गई ज़िंदगियों में दिखाई देती है।ये आंकड़े उन हज़ारों परिवारों का प्रतिनिधित्व करते हैं, जिन्हें अस्पताल के बिलों की चिंता किए बिना गुणवत्तापूर्ण उपचार मिला। चाहे आजीवन डायलिसिस की आवश्यकता वाला मरीज़ हो, नी रिप्लेसमेंट करवाने वाला बुज़ुर्ग व्यक्ति हो , सुरक्षित सीज़ेरियन डिलीवरी की आवश्यकता वाली महिला हो या आपातकालीन हृदय उपचार की ज़रूरत वाला मरीज़ हो —मुख्यमंत्री सेहत योजना यह सुनिश्चित कर रही है कि आर्थिक बाधाएँ स्वास्थ्य सेवा हासिल करने में कभी रुकावट न बनें।”

 

उन्होंने कहा कि योजना के तहत कवर की जाने वाली विभिन्न चिकित्सा प्रक्रियाएँ पंजाब में ऐसी स्वास्थ्य व्यवस्था विकसित करने के प्रयासों को दर्शाती हैं जो केवल सामान्य उपचार तक सीमित नहीं है बल्कि गंभीर और जटिल बीमारियों के महँगे इलाज में भी मरीज़ों को सहायता प्रदान करने में सक्षम है।

 

आंकड़ों से परे, यह डेटा एक बड़े बदलाव की ओर भी संकेत करता है। अधिक लोग आर्थिक रूप से सुलभ उपचार के कारण दीर्घकालिक बीमारियों से उबर रहे हैं। अधिक बुज़ुर्ग मरीज़ दोबारा चलने-फिरने में सक्षम हो रहे हैं। अधिक महिलाओं को अस्पतालों में मातृ स्वास्थ्य सेवाएँ मिल रही हैं और अधिक परिवार अस्पताल के बिलों के लिए पैसे जुटाने के बजाय मरीज़ के स्वस्थ होने पर ध्यान केंद्रित कर पा रहे हैं।

 

योजना के विस्तार के साथ यह पंजाब के सबसे मज़बूत सामाजिक सुरक्षा कार्यक्रमों में से एक के रूप में उभर रही है, जो केवल स्वास्थ्य उपचार के लिए वित्तीय सहायता उपलब्ध नहीं करवाती, बल्कि गंभीर बीमारी के कारण परिवारों पर पड़ने वाले आर्थिक झटके से भी उन्हें बचाने का काम कर रही है।