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‘मन की बात’ में PM मोदी ने की धावक गुरिंदरवीर सिंह की सराहना, युवाओं के लिए बताया प्रेरणा स्रोत

May 31, 2026By Short Daily News

प्रधानमंत्री Narendra Modi ने अपने लोकप्रिय रेडियो कार्यक्रम ‘मन की बात’ के दौरान भारतीय धावक Gurindervir Singh की ऐतिहासिक उपलब्धि की जमकर सराहना की। प्रधानमंत्री ने गुरिंदरवीर को 100 मीटर दौड़ में नया राष्ट्रीय रिकॉर्ड बनाने पर बधाई देते हुए कहा कि उनकी सफलता देश के युवाओं के लिए प्रेरणा का स्रोत है। इस दौरान उन्होंने गुरिंदरवीर से सीधे बातचीत कर उनके संघर्ष, मेहनत और सफलता के सफर के बारे में भी जानकारी ली।

बातचीत के दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि खेल केवल जीतने का माध्यम नहीं हैं, बल्कि खुद को बेहतर बनाने, चुनौतियों को स्वीकार करने और दूसरों को प्रेरित करने का भी जरिया हैं। उन्होंने गुरिंदरवीर और उनके साथी खिलाड़ियों को बधाई देते हुए कहा कि ऐसी उपलब्धियां भारत को वैश्विक खेल मंच पर नई पहचान दिला रही हैं।

गुरिंदरवीर सिंह ने बताया कि वह भारतीय नौसेना में पेटी ऑफिसर के रूप में सेवा दे रहे हैं और खेलों के साथ-साथ देश सेवा को भी अपना सबसे बड़ा कर्तव्य मानते हैं। उन्होंने हाल ही में 100 मीटर दौड़ को महज 10.09 सेकंड में पूरा कर नया राष्ट्रीय रिकॉर्ड बनाया है। इस प्रदर्शन के साथ वह 10.10 सेकंड की बाधा तोड़ने वाले पहले भारतीय धावक बन गए हैं, जो भारतीय एथलेटिक्स के इतिहास में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि मानी जा रही है।

गुरिंदरवीर ने अपने बचपन की यादें साझा करते हुए बताया कि वह महान धावक Milkha Singh मिल्खा सिंह की कहानियां सुनते हुए बड़े हुए हैं। उनके परिवार में खेलों का माहौल रहा है। उनके पिता और दादा भी खेलों से जुड़े रहे, जिसके कारण बचपन से ही उनके मन में खेलों के प्रति विशेष रुचि पैदा हुई।

उन्होंने बताया कि हर साल दिवाली और नए साल पर घर की सफाई करते समय वह अपने पिता के जीते हुए पदक और ट्रॉफियों को साफ किया करते थे। उन ट्रॉफियों को देखकर उनके मन में खेलों के प्रति उत्साह बढ़ता गया। वह अपने पिता से हर ट्रॉफी के पीछे की कहानी पूछते थे और उनके पिता अपने संघर्ष, मेहनत और खेल यात्रा के अनुभव साझा करते थे। इन्हीं कहानियों ने उनके भीतर एक बड़ा खिलाड़ी बनने का सपना जगाया।

गुरिंदरवीर ने बताया कि जब उन्होंने 100 मीटर दौड़ को अपना मुख्य इवेंट बनाने का फैसला किया तो कई लोगों ने उन्हें हतोत्साहित करने की कोशिश की। लोगों का कहना था कि 100 मीटर स्प्रिंट भारतीय खिलाड़ियों के लिए नहीं है और इस स्पर्धा में विश्व स्तर पर सफलता हासिल करना आसान नहीं है। लेकिन उन्होंने और उनके पिता ने कभी अपना विश्वास नहीं खोया और अपने लक्ष्य पर डटे रहे।

उन्होंने कहा कि उनके पिता का भरोसा और हौसला ही उनकी सबसे बड़ी ताकत बना। उसी विश्वास के सहारे उन्होंने लगातार मेहनत की और आज वह मुकाम हासिल किया, जिसे कभी असंभव माना जाता था। उनकी सफलता इस बात का प्रमाण है कि मजबूत इरादों और कठिन परिश्रम से कोई भी लक्ष्य हासिल किया जा सकता है।

अपने संघर्षपूर्ण दिनों को याद करते हुए गुरिंदरवीर ने कहा कि सफलता का रास्ता कभी आसान नहीं होता। कई बार हार का सामना करना पड़ा, कई प्रतियोगिताओं में उम्मीद के मुताबिक प्रदर्शन नहीं हुआ और चोटों ने भी राह में बाधाएं पैदा कीं। लेकिन हर कठिन समय में उनके परिवार, कोच और करीबी लोगों ने उनका साथ दिया।

उन्होंने अपने कोच का विशेष रूप से धन्यवाद करते हुए कहा कि उन्होंने हमेशा उन्हें यही सिखाया कि यदि आप खुद पर विश्वास नहीं करेंगे तो कोई और भी आप पर विश्वास नहीं करेगा। गुरिंदरवीर ने कहा कि परिवार, कोच और समाज से मिलने वाला समर्थन किसी भी खिलाड़ी की सबसे बड़ी ताकत होता है और यही प्रेरणा उन्हें हर दिन नए कीर्तिमान स्थापित करने के लिए प्रेरित करती है।