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G7 Summit से पहले बोले S. Jaishankar – “Global South की आवाज़ उठाने का समय, भारत बनेगा सेतु”

June 16, 2025By Short Daily News

G7 शिखर सम्मेलन से ठीक पहले भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि अब समय आ गया है कि भारत Global South की आवाज़ बनकर अंतरराष्ट्रीय मंच पर अपनी मौजूदगी दर्ज कराए। उन्होंने साफ किया कि भारत, दुनिया के अलग-अलग देशों के साथ इस तरह से रिश्ते निभाता है जिससे किसी भी देश के साथ उसका रिश्ता “exclusively” जुड़ा हुआ ना लगे। यही भारत की सबसे बड़ी ताकत है।

BRICS का मजबूत सदस्य है भारत

जयशंकर ने कहा कि भारत BRICS (ब्राज़ील, रूस, इंडिया, चीन, साउथ अफ्रीका) जैसे मजबूत ग्रुप का लीडिंग मेंबर है। यह ग्रुप अब एक आर्थिक शक्ति बनता जा रहा है और G7 का एक बड़ा विकल्प भी माना जा रहा है।

G7 में सदस्य नहीं, फिर भी बुलाया गया भारत

G7 में भारत सदस्य नहीं है, लेकिन 2019 से लगातार भारत को इन बैठकों में बुलाया जा रहा है। इस बार भी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को कनाडा में होने वाले G7 सम्मेलन में हिस्सा लेने के लिए आमंत्रित किया गया है। साथ ही यूक्रेन, मैक्सिको, दक्षिण अफ्रीका और साउथ कोरिया के नेताओं को भी बुलाया गया है।

जयशंकर ने कहा, “Global South के देश आज भी अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था की असमानताओं को लेकर नाराज़ हैं। बदलाव की मांग है और भारत इसका हिस्सा है। ऐसे समय में हमें अपनी बात मज़बूती से रखनी चाहिए।”

अमेरिका-रूस के तनाव के बीच भारत की भूमिका

इस सम्मेलन में रूस और चीन के साथ रिश्तों पर भी चर्चा होगी। भारत का हमेशा से मानना रहा है कि रूस और यूक्रेन के बीच सीधी बातचीत होनी चाहिए, न कि पाबंदियों का रास्ता अपनाया जाए।

जयशंकर ने कहा कि रूस पर लगाए गए sanctions (पाबंदियों) से कोई बड़ा असर नहीं पड़ा है। “पाबंदियों से नीति नहीं बदली जाती”, उन्होंने कहा।

यूरोपियन देश अब “secondary sanctions” की तैयारी कर रहे हैं, जिसमें रूस से तेल, गैस और कच्चा माल खरीदने वाले देशों पर 500% टैक्स लगाने की बात हो रही है। इस पर जयशंकर ने कहा – “दुनिया को अभी और टेंशन, और तनाव की ज़रूरत नहीं है।”

ट्रम्प और मोदी की संभावित मुलाकात

इस सम्मेलन में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प भी हिस्सा लेंगे। उम्मीद है कि मोदी और ट्रम्प के बीच एक ट्रेड डील को लेकर अहम बातचीत हो सकती है। अमेरिका भारत का सबसे बड़ा ट्रेडिंग पार्टनर है और दोनों देशों के बीच टैक्स और ड्यूटी को लेकर 9 जुलाई तक का वक्त है।

जयशंकर ने कहा कि ट्रम्प एक “बहुत nationalist” (राष्ट्रवादी) नेता हैं जो अपने देश के हित को सबसे ऊपर रखते हैं।

चीन से संतुलन, पाकिस्तान पर सख्ती

जहां तक चीन की बात है, जयशंकर ने कहा कि भारत-चीन दोनों ही उभरती हुई शक्तियां हैं, और दोनों देशों को अपनी ताकत समझते हुए संतुलित संबंध बनाने चाहिए।

हालांकि उन्होंने साफ किया – “जहां ज़रूरत हो हम मज़बूती से खड़े रहेंगे, और जहां स्थिरता की ज़रूरत हो, वहां बातचीत के लिए भी तैयार हैं।”

जयशंकर ने यह भी बताया कि पाकिस्तान और चीन की नज़दीकी को भारत नजरअंदाज नहीं कर सकता। हाल ही में कश्मीर में हुए हमले के बाद भारत और पाकिस्तान के बीच जो तनाव हुआ था, उसमें चीन के फाइटर जेट्स भी इस्तेमाल हुए थे।

पर जब पूछा गया कि क्या इससे nuclear war (परमाणु युद्ध) का खतरा था, तो जयशंकर ने साफ कहा – “ऐसा डर सिर्फ उन्हें था जो असल हालात से अनजान थे।”

भारत अब सिर्फ एक दर्शक नहीं, बल्कि ग्लोबल लेवल पर एक एक्टिव प्लेयर बन चुका है। चाहे रूस-यूक्रेन युद्ध हो, अमेरिका से ट्रेड डील की बात हो, या चीन-पाकिस्तान के साथ जटिल रिश्ते – भारत हर मुद्दे पर अपनी समझदारी से न केवल संतुलन बना रहा है बल्कि Global South की आवाज़ भी बनता जा रहा है। G7 सम्मेलन में भारत की भूमिका अब और भी अहम हो चुकी है।