मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ रविवार को संत शिरोमणि सद्गुरु रविदास जी की 649वीं जयंती पर आयोजित कार्यक्रम में शामिल हुए। इस अवसर पर उन्होंने बाराबिरवा, कानपुर रोड स्थित संत रविदास मठ में संत रविदास जी की प्रतिमा और सभागार का लोकार्पण किया। मुख्यमंत्री ने कहा कि संत रविदास का प्रकटीकरण 649 वर्ष पूर्व काशी के सीर गोवर्धन में हुआ था। इतने वर्षों बाद भी उनकी दिव्य प्रेरणा समाज को आलोकित कर रही है और ‘एक भारत-श्रेष्ठ भारत’ के निर्माण की दिशा दिखा रही है।
विदेशी आक्रांताओं के दौर में भी संत रविदास ने दिखाई कर्म की राह
सीएम योगी ने कहा कि संत रविदास के समय देश विदेशी आक्रांताओं से पीड़ित था, लेकिन उन्होंने साधना की पवित्रता को कर्म की साधना में बदलकर समाज को नई दिशा दी। उन्होंने वैष्णव परंपरा के अनुरूप उपासना का मार्ग बताया, जिसमें कर्म की प्रधानता, मन की शुद्धता और लोककल्याण को सर्वोपरि रखा गया।
संतों ने समाज को जोड़ने का किया ऐतिहासिक कार्य
मुख्यमंत्री ने संत रविदास के वाक्य “मन चंगा तो कठौती में गंगा” का उल्लेख करते हुए कहा कि जीवन का हर परिणाम कर्म पर निर्भर करता है। संत रामानंद से दीक्षा प्राप्त करने के बाद संत रविदास ने कर्म साधना के माध्यम से समाज को जोड़ा। सीएम योगी ने कहा कि मध्यकाल में जगद्गुरु रामानंदाचार्य ने विभिन्न जातियों से 12 शिष्य बनाकर सामाजिक एकता की मिसाल पेश की। संतों द्वारा किया गया यह कार्य अद्भुत था और आधुनिक भारत की नींव भी इसी पर टिकी है।
