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Punjab News: सांसद मालविंदर कंग ने संसद में महिला आरक्षण और परिसीमन के मुद्दे पर मजबूती से पार्टी का रखा पक्ष

April 17, 2026By Short Daily News

Punjab News:आम आदमी पार्टी (आप) पंजाब के आनंदपुर साहिब से सांसद मालविंदर सिंह कंग ने संसद में महिला आरक्षण और परिसीमन के मुद्दे पर पार्टी का पक्ष मजबूती से रखा। कंग ने स्पष्ट किया कि आम आदमी पार्टी और उनके राष्ट्रीय नेतृत्व अरविंद केजरीवाल व पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान महिला आरक्षण बिल के पूर्ण समर्थन में हैं और केंद्र सरकार से मांग करते हैं कि 2023 में कानून बन चुके इस बिल को बिना किसी देरी के जल्द से जल्द लागू किया जाए।

महिलाओं के सम्मान की सीख हमें गुरु साहिबान ने दी है

महिला सशक्तिकरण पर बोलते हुए कंग ने कहा कि महिलाओं के सम्मान की सीख हमें गुरु साहिबान ने दी है। उन्होंने याद दिलाया कि जब देश में सती प्रथा का बोलबाला था, तब गुरु रामदास जी और गुरु अर्जन देव जी ने इसके खिलाफ आवाज उठाई थी।

कंग ने आगे कहा कि जब दुनिया के विकसित देशों में महिलाओं को वोट का अधिकार नहीं था, तब सिखों की सिरमौर संस्था एसजीपीसी ने 1920 में ही महिलाओं को मतदान का अधिकार दे दिया था।

संसद में अपनी बात रखते हुए मालविंदर सिंह कंग ने परिसीमन के मुद्दे पर केंद्र सरकार को घेरा। उन्होंने कहा कि परिसीमन के माध्यम से पंजाब जैसे छोटे राज्यों की राजनीतिक नुमाइंदगी को खत्म करने की साजिश रची जा रही है, जिसका वह कड़ा विरोध करते हैं। कंग ने कहा कि आजादी की लड़ाई में पंजाब ने 2% जनसंख्या होने के बावजूद सबसे ज्यादा बलिदान दिए, लेकिन राजनीतिक प्रतिनिधित्व कम होने के कारण हमसे हमारी राजधानी चंडीगढ़ छीन लिया गया और अब भाखड़ा डैम जैसे प्रबंधन से भी पंजाब की नुमाइंदगी खत्म की जा रही है।

जनसंख्या नियंत्रण का खामियाजा पंजाब को भुगतना पड़ रहा है

कंग ने तर्क दिया कि भारत राज्यों का एक संघ है। जब केंद्र सरकार ने जनसंख्या नियंत्रण की अपील की थी, तो पंजाब ने उसका बखूबी पालन किया। आज उसी जनसंख्या नियंत्रण का खामियाजा पंजाब को भुगतना पड़ रहा है क्योंकि कम आबादी के आधार पर लोकसभा और विधानसभा में पंजाब की सीटें कम की जा रही हैं। उन्होंने आशंका जताई कि केंद्र सरकार अपने बहुमत का दुरुपयोग कर अपने राजनीतिक हितों को साधने के लिए सीटों की सीमाबंदी मनमाने ढंग से कर सकती है।

संसद में अपनी बात को खत्म करते हुए कंग ने कहा कि केंद्र सरकार महिला आरक्षण कानून को तुरंत जमीन पर उतारे, लेकिन परिसीमन के नाम पर संघीय ढांचे और छोटे राज्यों के अधिकारों से खिलवाड़ बंद करे।