- तहसील में कदम-कदम पर रिश्वत, कमीशन और एजेंट थे: CM मान ने कहा कि पहले तहसील में जाने का डर लगता था। एक बार अंदर चले जाते थे तो अरदास करते थे कि सही-सलामत बाहर निकल जाएं। कदम-कदम पर रिश्वत, कदम-कदम पर कमीशन, कदम-कदम पर एजेंट बैठे थे। एजेंट डराते थे कि यह काम नहीं हो सकता। पंगा पड़ जाएगा। फिर कहते थे कि करवा देते हैं और बदले में रुपए ले लेते थे। मगर, अब सारा झंझट खत्म हो गया है।
- रिश्वत नहीं देनी होगी, लिखित में मिलेंगे रुपए: CM ने कहा- अब 20 से 22 मिनट तहसील में आकर रजिस्ट्री या कोई भी काम करवाकर निकल सकते हैं। इसके लिए कोई रिश्वत नहीं देनी पड़ेगी। हर काम के लिए एक रसीद होगी। लिखित में होगा। कोई लिखित में दिए से ज्यादा पैसे लेता है तो उस पर एक्शन होगा। आप हमें बता सकते हो।
- घर से रजिस्ट्री लिखकर ला सकते हैं: CM मान ने आगे कहा- कोई रजिस्ट्री घर से लिखकर भी ला सकता है। अगर नहीं लिखनी हो तो यहां आकर 500 रुपए में लिखवाई जा सकती है। यहां लिखने का प्रबंध किय गया है। एतराज या कागजों की पड़ताल के लिए 48 घंटे दिए गए हैं। पारदर्शी तरीके से अब बिना धक्कों के काम होगा।
- 1076 पर फोन पर सारी सुविधा: CM ने कहा- रेवेन्यू विभाग की हेल्पलाइन 1076 सुचारू ढंग से चल रही है। अब लोगों को कम से कम चक्कर लगाने पड़ेंगे। सिर्फ फोटो करानी जरूरी होती है। बाकी सारे काम इस फोन नंबर पर हो जाएंगे। विभाग के लोग मशीन लेकर आपके घर भी आ सकते हैं।
- तहसील में सब सुविधाएं मिलेंगी: CM ने कहा- तहसीलों में वेटिंग रूम, बाथरूम, पीने का पानी और सिटिंग एरिया मिलेगा। हर व्यक्ति को टोकन नंबर मिलेगा। स्क्रीन पर यह नंबर नजर आएगा। पहले से टाइम मिलेगा कि किस टाइम से किस टाइम तक उनकी रजिस्ट्री हो जाएगी, तभी आना और रजिस्ट्री लेकर चले जाना है।
- सबसे पहले http://www.easyregistry.punjab.gov.in पर लॉगिन करे। पोर्टल पर रजिस्ट्री का ऑनलाइन स्लॉट बुक किया जाता है, जिसमें खरीदार विक्रेता की बेसिक जानकारी भरी जाती है।
- इसके बाद प्रॉपर्टी का पूरा विवरण दर्ज किया जाता है जैसे प्रॉपर्टी की किस्म, खसरा नंबर, पता और एरिया आदि।
- फिर आधार कार्ड, PAN कार्ड, सेल डीड ड्राफ्ट, फोटो, बिजली बिल और NOC जैसे दस्तावेज पोर्टल पर PDF में अपलोड किए जाते हैं।
- स्टांप ड्यूटी और रजिस्ट्री फीस का भुगतान नेट बैंकिंग/UPI/डेबिट कार्ड से ऑनलाइन किया जाता है और ई-रसीद मिल जाती है।
- पोर्टल पर ऑटो-ड्राफ्ट सेल डीड तैयार होती है, जिसमें जरूरत पड़ने पर बदलाव किए जा सकते हैं और इसे फाइनल कर दिया जाता है।
- स्लॉट के दिन खरीदार, विक्रेता और गवाह तय समय पर सब-रजिस्ट्रार ऑफिस पहुंचते हैं। वहां सबका बायोमेट्रिक वेरिफिकेशन किया जाता है, जिसमें फिंगरप्रिंट और आधार OTP से पहचान पक्की की जाती है।
- सब-रजिस्ट्रार सभी दस्तावेज़, फीस और प्रॉपर्टी विवरण चेक करके रजिस्ट्री को डिजिटल रूप से मंजूर करता है।
- मंजूरी के बाद रजिस्ट्री की डिजिटल कॉपी पोर्टल से डाउनलोड की जा सकती है और हार्ड कॉपी ऑफिस से मिल जाती है
