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Former Dirba MLA Baldev Singh Mann दोबारा SAD में शामिल, 1 September को AAP Government के खिलाफ मोर्चा

August 10, 2025By Short Daily News

पंजाब की राजनीति में एक बार फिर हलचल देखने को मिली जब पूर्व दिरबा विधायक बलदेव सिंह मान ने लंबे समय बाद फिर से शिरोमणि अकाली दल (SAD) का दामन थाम लिया। मान 1977 से 1992 तक तीन बार दिरबा से विधायक रह चुके हैं। पिछले साल उन्होंने SAD के बगावती धड़े सुधार लहर’ (जो अब भंग हो चुका है) में शामिल होकर पार्टी छोड़ दी थी।

शुक्रवार को SAD अध्यक्ष सुखबीर सिंह बादल ने संगरूर के सुल्लर घराट गांव में मान के निवास पर एक कार्यक्रम के दौरान उनकी वापसी का ऐलान किया। बादल ने मान को पिता समान” बताते हुए कहा कि वह हमेशा से पार्टी के मजबूत स्तंभ रहे हैं और उनका दोबारा SAD में आना पार्टी के लिए बड़ी ताकत है। उन्होंने यह भी कहा कि उन्होंने सभी पुराने अकाली नेताओं से पार्टी में लौटने की अपील की थी और मान का ये फैसला उसी अपील का सकारात्मक जवाब है।

1 सितंबर को होगा बड़ा मोर्चा

सुखबीर सिंह बादल ने इस मौके पर घोषणा की कि SAD 1 सितंबर को मोहाली के अंब साहिब गुरुद्वारा से AAP सरकार की लैंड पूलिंग पॉलिसी के खिलाफ मोर्चा निकालेगा। उन्होंने इस पॉलिसी को “65,000 एकड़ जमीन किसानों से छीनने की साजिश” करार दिया।

बादल ने कहा कि भले ही पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने इस पॉलिसी पर एक महीने की रोक लगा दी है, लेकिन SAD का विरोध तब तक जारी रहेगा जब तक इसे पूरी तरह वापस नहीं लिया जाता। उनका आरोप है कि AAP सरकार किसानों की मेहनत और जमीन पर डाका डालने की कोशिश कर रही है।

कांग्रेस और AAP दोनों पर निशाना

SAD प्रमुख ने अपने भाषण में पूर्व कांग्रेस सरकार और मौजूदा AAP सरकार — दोनों को आड़े हाथों लिया। उनका कहना था कि दोनों ही पार्टियों ने पंजाब के हितों के साथ विश्वासघात किया है। उन्होंने वादा किया कि अगर 2027 में SAD सत्ता में आता है, तो पार्टी:

  • किसानों की समस्याओं का समाधान करेगी और कृषि को पुनर्जीवित करेगी
  • नए उद्योग लगाएगी
  • युवाओं के लिए रोजगार के बड़े अवसर पैदा करेगी

पृष्ठभूमि: लैंड पूलिंग पॉलिसी पर विवाद

पंजाब सरकार की लैंड पूलिंग पॉलिसी को लेकर पिछले कुछ महीनों से किसानों और विपक्षी दलों में नाराज़गी है। आरोप है कि इस पॉलिसी के तहत सरकार किसानों की जमीन जबरन लेकर प्रोजेक्ट्स में इस्तेमाल करना चाहती है। हाईकोर्ट ने फिलहाल इस पॉलिसी पर एक महीने की रोक लगाई है, लेकिन विवाद और राजनीतिक बयानबाज़ी लगातार जारी है। SAD ने पहले भी इस मुद्दे पर कई विरोध प्रदर्शन किए हैं और अब 1 सितंबर का मोर्चा इसे और बड़ा रूप देने की कोशिश है।