पंजाब के मोगा जिले का छोटा-सा गांव रंसिह कलां आज पूरे देश में चर्चा का विषय बना हुआ है। वजह है इस गांव का पराली न जलाने का शानदार मॉडल, जिसे देखने खुद केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान यहां पहुंचे। मंत्री ने गांव के प्रयासों को “National Example” बताते हुए कहा कि देश के बाकी राज्यों को भी पंजाब के इस मॉडल से सीख लेनी चाहिए।
6 साल से एक भी पराली नहीं जलाई गई — गांव ने बनाया रिकॉर्ड
चौहान ने दौरे के दौरान सबसे बड़ी बात ये कही कि रंसिह कलां गांव में पिछले छह सालों से एक भी पराली जलाने का मामला नहीं मिला है।
यह सुनकर उन्होंने खुलकर कहा—
“पंजाब ने जिस तरह से स्टबल मैनेजमेंट किया है, वो पूरे देश के लिए मिसाल है।”
पंजाब मॉडल क्यों बना खास?
गांव की इस सफलता के पीछे मुख्य तौर पर पंजाब सरकार की नीतियाँ बताई जा रही हैं।
मुख्यमंत्री भगवंत मान की सरकार ने किसानों को—
- scientific तरीके,
- modern मशीनरी,
- training,
- और financial support
देकर पराली को जलाने की बजाय खेत में मिलाने के लिए प्रोत्साहित किया।
इस Model का सबसे बड़ा असर यह हुआ कि—
- मिट्टी की उर्वरता (fertility) बढ़ी
- रासायनिक खाद की जरूरत लगभग 30% कम हुई
- गेहूं, आलू और अन्य फसलों की पैदावार में सुधार आया
- खेती की cost कम हुई
- खेतों में(environment) ecological balance बेहतर हुआ
कई किसानों ने बताया कि पराली को खेत में मिलाने से पोटाश जैसी natural value खुद मिट्टी में लौट आती है, जिससे फसल की quality बढ़ती है।
पंजाब में पराली जलाने की घटनाएँ 83% कम
इस साल पंजाब में पराली जलाने की घटनाएँ इतिहास में पहली बार 83% तक घटी हैं।
जो राज्य सालों तक पराली के लिए आलोचना झेलता था, आज वही देश में सबसे सफल मॉडल बनकर सामने आया है।
गांव में विकास और सामाजिक बदलाव भी बड़ी वजह
रंसिह कलां सिर्फ इसलिए खास नहीं है कि यहां पराली नहीं जलाई जाती—
गांव में कई ऐसी development activities भी चल रही हैं जो इसे “ideal village” बनाती हैं:
- किसानों को पराली न जलाने पर cash incentives
- फलदार पौधे लगाने की पुरस्कार योजना
- गांव की लाइब्रेरी में नई पढ़ने की culture को बढ़ावा
- plastic-free village मिशन
- rainwater harvesting सिस्टम
- नशा-मुक्ति (drug-free) अभियान
- बच्चों और युवाओं के लिए regular activities
केंद्रीय मंत्री ने कहा,
“गांव में जिस तरह से environmental और social development साथ-साथ चल रहा है, वह बहुत inspiring है।”
मंत्री ने चखा पंजाब का मशहूर ‘मक्की दी रोटी – सरसों दा साग’
दौरे के दौरान शिवराज चौहान ने गांव के लोगों के साथ बैठकर मक्की दी रोटी और सरसों दा साग भी खाया।
उन्होंने कहा कि पंजाब की hospitality दिल जीते लेती है और यहां आकर उन्होंने महसूस किया कि successful stubble management model असली रूप में यहीं देखने को मिलता है।
देशभर के किसानों से अपील
मंत्री ने साफ कहा कि:
“हम इस मॉडल को देश के हर राज्य तक ले जाएंगे। पराली को जलाने की बजाय resource की तरह इस्तेमाल करना ही भविष्य है।”
उन्होंने यह भी बताया कि—
- पराली जलाने से सिर्फ pollution नहीं बढ़ता,
- बल्कि मिट्टी के कीट, nutrients और जमीन की शक्ति भी खत्म होती है।
इसलिए Crop-Residue Management को priority देना जरूरी है।
रंसिह कलां गांव आज देश में एक उदाहरण है कि सही नीतियाँ, सरकारी support और किसानों की मेहनत मिलकर किसी बड़ी समस्या को कैसे खत्म कर सकती हैं।
पंजाब सरकार और गांव के किसानों की ये साझी मेहनत अब एक National Model बन चुकी है, जिसे केंद्र सरकार भी अपनाने की बात कह रही है।
