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Central Government ने की Mann सरकार की सराहना, Punjab की सफ़लता, किसानों के सहयोग से Stubble Burning Incidents में 85% की ऐतिहासिक गिरावट

November 11, 2025By Short Daily News

पंजाब के किसान अब सिर्फ अन्न उगाने वाले नहीं रहे। अब वे पराली क्रांति (Stubble Burning Revolution) के जरिए पर्यावरण के रक्षक भी बन गए हैं। यह बदलाव इतना बड़ा है कि केंद्रीय वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (CAQM) के अध्यक्ष राजेश वर्मा खुद इसका अध्ययन करने और किसानों की सराहना करने राजपुरा थर्मल प्लांट पहुंचे।

राजेश वर्मा का कहना है कि उनका दौरा सिर्फ़ चेक करने या जुर्माना लगाने के लिए नहीं था, बल्कि यह देखने के लिए था कि कैसे पंजाब के किसान अपने खेतों की पराली जलाने की जगह सस्टेनेबल और स्मार्ट विकल्प चुन रहे हैं।

पराली जलाने में ऐतिहासिक कमी

आंकड़े बताते हैं कि पंजाब में इस मुद्दे पर बड़ा बदलाव आया है:

  • 2021: 71,300 पराली जलाने की घटनाएं दर्ज
  • 2024: घटकर 10,900 घटनाएं (लगभग 85% कमी)
  • 2025 (अब तक): केवल 3,284 घटनाएं

इस रुझान से साफ पता चलता है कि पंजाब के किसान अब अपने खेतों की पराली जलाने की बजाय इसे बायोमास ईंधन (Biomass Fuel) में बदल रहे हैं।

राजेश वर्मा ने कहा,

“धान का पुआल अब किसानों के लिए आय का स्रोत बन गया है। जो कभी कचरा माना जाता था, अब उसे थर्मल प्लांटों के लिए बायोमास में बदल दिया जा रहा है।”

कैसे आया यह बदलाव?

यह बदलाव अचानक नहीं हुआ। इसके पीछे कुछ मुख्य कदम हैं:

  1. सरकारी सहयोग और निवेश – बायोमास संग्रह की इंफ्रास्ट्रक्चर में पैसा लगाया गया।
  2. शिक्षा और जागरूकता – किसानों को बताया गया कि पराली का वैकल्पिक इस्तेमाल कैसे किया जा सकता है और इससे उन्हें आर्थिक लाभ भी होगा।
  3. सस्टेनेबल मॉडल – आम आदमी पार्टी की सरकार ने किसानों के साथ मिलकर समाधान तैयार किया।

इस पहल का असर सिर्फ किसानों की आय तक ही सीमित नहीं है, बल्कि उत्तर भारत की वायु गुणवत्ता में सुधार भी हुआ है।

किसानों की नई पहचान

पंजाब के किसान अब केवल अन्न उगाने वाले नहीं, बल्कि समाधान पैदा करने वाले बन गए हैं। यह बदलाव उनके लिए गर्व की बात है। वे अब अपनी कृषि विरासत को बनाए रखते हुए पर्यावरण की रक्षा भी कर रहे हैं।

राजेश वर्मा ने जोर देकर कहा:

“इस साल पराली जलाने की घटनाओं में तेजी से कमी दिख रही है। यह साबित करता है कि किसान ‘पराली क्रांति’ का नेतृत्व कर रहे हैं।”

पड़ोसी राज्यों के साथ तुलना

पंजाब के उदाहरण से पड़ोसी राज्यों में अंतर साफ दिखता है। जबकि पंजाब में हवा साफ हुई है, दिल्ली में अब भी प्रदूषण की समस्या बनी हुई है। अंतर? पंजाब ने समस्या के स्रोत (Source) पर कार्रवाई की और किसानों के साथ सहयोग किया, उनके खिलाफ नहीं।

पराली क्रांति का संदेश

  • आर्थिक लाभ: किसानों के लिए नए आय स्रोत
  • पर्यावरण सुरक्षा: कम प्रदूषण और साफ हवा
  • सामाजिक संदेश: किसान अब अपने खेत और पर्यावरण के संरक्षक हैं
  • सकारात्मक बदलाव: कृषि समृद्धि और पर्यावरणीय जिम्मेदारी अब साथ-साथ चल सकते हैं

जैसे ही दिवाली का त्योहार आया, पंजाब के किसानों ने साफ आसमान के साथ पूरे उत्तर भारत को एक उपहार दिया—यह दिखाने के लिए कि जब समुदायों को विकल्प और सपोर्ट दिया जाता है, तो वे सही रास्ता चुनते हैं।

पंजाब की यह कहानी परिवर्तन, जिम्मेदारी और नेतृत्व की है। और इसे वे किसान लिख रहे हैं जो देश को खिलाते हैं।