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170 दिन के बाद जेल से रिहा होंगे सोनम वांगचुक, सरकार ने हिरासत रद्द करने का लिया फैसला

March 14, 2026By Short Daily News
केंद्र सरकार ने शनिवार को लद्दाख के प्रसिद्ध जलवायु कार्यकर्ता सोनम वांगचुक की NSA के तहत हिरासत को तत्काल प्रभाव से रद्द कर दिया है। यह फैसला लगभग 6 महीने की हिरासत के बाद लिया गया है, जो लद्दाख में तनाव कम करने और बातचीत बढ़ाने की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है। बता दें कि वांगचुक को सितंबर 2025 में लेह में हुए हिंसक प्रदर्शनों के बाद हिरासत में ले लिया गया था। उनकी रिहाई को लेकर उस समय कई विपक्षी दलों ने आवाज उठाई थी।

वांगचुक की तत्काल रिहाई का आदेश

गृह मंत्रालय ने NSA की शक्तियों का इस्तेमाल करते हुए सोनम वांगचुक को बिना किसी शर्त के तुरंत रिहा करने का आदेश दिया है। वांगचुक को पिछले साल 26 सितंबर 2025 को लेह के जिला मजिस्ट्रेट के आदेश पर NSA के तहत हिरासत में लिया गया था। यह कार्रवाई 24 सितंबर 2025 को लेह में हुई हिंसक प्रदर्शनों के बाद की गई थी, जिसमें 4 लोगों की मौत हो गई थी और कई घायल हुए थे। ये प्रदर्शन लद्दाख को राज्य का दर्जा, छठी अनुसूची में शामिल करने, भूमि अधिकारों, नौकरियों और संवैधानिक सुरक्षा की मांग को लेकर हो रहे थे।

वांगचुकी की रिहाई पर जारी हुआ बयान

गृह मंत्रालय ने कहा है कि सरकार लद्दाख में शांति, स्थिरता और आपसी विश्वास का माहौल बनाने के लिए प्रतिबद्ध है, ताकि सभी पक्षों के साथ सार्थक और रचनात्मक बातचीत हो सके। बयान में कहा गया, ‘इस उद्देश्य को आगे बढ़ाने के लिए और विचार-विमर्श के बाद, सरकार ने NSA के तहत उपलब्ध शक्तियों का प्रयोग करते हुए श्री सोनम वांगचुक की हिरासत को तत्काल प्रभाव से रद्द करने का फैसला किया है।’ मंत्रालय ने यह भी दोहराया कि वांगचुक ने NSA के तहत अधिकतम हिरासत अवधि का लगभग आधा समय पहले ही पूरा कर लिया था।

हाई पावर्ड कमिटी और आगे की बातचीत

सरकार ने लद्दाख के लिए ‘सभी जरूरी सुरक्षा उपाय’ देने का वादा दोहराया है। अधिकारियों ने उम्मीद जताई कि वांगचुक की रिहाई से बातचीत फिर से तेज होगी। पहले से गठित हाई पावर्ड कमिटी में केंद्रीय मंत्री और स्थानीय नेता शामिल हैं, जो मांगों पर चर्चा कर रही है। हालांकि, कार्यकर्ताओं ने इसमें देरी की शिकायत की थी। अब उम्मीद है कि लद्दाख के मुद्दों जैसे 33 प्रतिशत स्थानीय नौकरी आरक्षण, विकास और सांस्कृतिक संरक्षण पर सकारात्मक प्रगति होगी। यह फैसला 2019 में लद्दाख को केंद्र शासित प्रदेश बनाने के बाद से चली आ रही मांगों और आंदोलनों के बीच आया है, जहां लेह एपेक्स बॉडी जैसे संगठन सक्रिय रहे हैं।