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‘सतलुज’ फिल्म पर रवनीत सिंह बिट्टू का बड़ा हमला, 25 हजार लापता लोगों के दावे पर मांगे दस्तावेजी सबूत

July 12, 2026By Short Daily News

फिल्म ‘सतलुज’ को लेकर विवाद लगातार गहराता जा रहा है। केंद्रीय रेल एवं खाद्य प्रसंस्करण उद्योग राज्य मंत्री रवनीत सिंह बिट्टू ने फिल्म के निर्माता और निर्देशक पर तीखा हमला बोलते हुए फिल्म में किए गए 25 हजार लापता या कथित तौर पर अवैध तरीके से अंतिम संस्कार किए गए लोगों के दावे के दस्तावेजी प्रमाण सार्वजनिक करने की मांग की है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि इस दावे के समर्थन में विश्वसनीय सबूत पेश नहीं किए गए, तो उपलब्ध सभी संवैधानिक और कानूनी विकल्पों पर विचार किया जाएगा।

प्रेस बयान जारी करते हुए बिट्टू ने कहा कि ‘रचनात्मक स्वतंत्रता’ के नाम पर विवादित दावों को स्थापित इतिहास के रूप में पेश नहीं किया जा सकता। उन्होंने कहा कि पंजाब का दर्दनाक इतिहास किसी एक विचारधारा या पूर्वाग्रह के आधार पर चुनिंदा तरीके से नहीं दिखाया जा सकता।

उन्होंने सवाल उठाया कि फिल्म में आतंकवाद के दौर में मारे गए निर्दोष हिंदुओं, बस यात्रियों, दुकानदारों, सरकारी कर्मचारियों, मजदूरों और आम नागरिकों की पीड़ा को समान महत्व क्यों नहीं दिया गया। साथ ही आतंकवाद से लड़ते हुए शहीद हुए पंजाब पुलिस और सुरक्षा बलों के हजारों जवानों के बलिदान को भी नजरअंदाज करने का आरोप लगाया।

बिट्टू ने कहा कि फिल्म में 25 हजार लापता लोगों का आंकड़ा किस आधार पर दिखाया गया है, यह स्पष्ट किया जाना चाहिए। उन्होंने पूछा कि क्या यह आंकड़ा आधिकारिक रूप से प्रमाणित है, किसी जांच रिपोर्ट पर आधारित है या केवल एक अनुमान है। उनके अनुसार, किसी भी जिम्मेदार फिल्म निर्माता को विवादित आंकड़ों को अंतिम सत्य के रूप में प्रस्तुत करने का अधिकार नहीं है।

केंद्रीय मंत्री ने फिल्म निर्माताओं से निर्धारित समय सीमा के भीतर अपने दावे का पूरा दस्तावेजी आधार सार्वजनिक करने की मांग की। उन्होंने कहा कि यदि ऐसा नहीं किया जाता, तो उन्हें पंजाब की जनता के सामने यह स्वीकार करना चाहिए कि यह आंकड़ा आधिकारिक रूप से प्रमाणित नहीं है।

बिट्टू ने कहा कि पंजाब का इतिहास तथ्यों और प्रमाणों के आधार पर ही प्रस्तुत किया जाना चाहिए। किसी भी पक्ष के दर्द, बलिदान और इतिहास को नजरअंदाज कर एकतरफा कहानी पेश करना उचित नहीं है। उन्होंने दोहराया कि “सत्य को प्रचार पर, तथ्यों को कल्पना पर और प्रमाणों को भावनाओं पर हमेशा प्राथमिकता मिलनी चाहिए।”