Search

BREAKING
अबोहर और मोरिंडा नगर निगम चुनावों में ‘आप’ की शानदार जीत, मेयर, प्रधान और सभी अहम पदों पर कब्जा राम मंदिर के डकैतों को सजा दिलाने के लिए रविवार को सुंदरकांड पाठ कर सिग्नेचर कैंपेन की शुरूआत करेगी ‘‘आप’’- केजरीवाल पंजाब को जल्द मिल सकता है नया स्थायी DGP, तीन नामों पर चर्चा भगवंत मान सरकार ने जसवंत सिंह खालड़ा मर्डर केस के दोषियों की समय से पहले रिहाई से जुड़ी किसी भी फाइल पर साइन नहीं किया- बलतेज पन्नू पंजाब की वोटर लिस्ट से किसी भी असली वोटर का नाम नहीं हटाया जाना चाहिए, आप के कार्यकर्ता हर नागरिक की मदद के लिए तैयार हैं: अमन अरोड़ा पंजाब के बिजली उपभोक्ताओं को राहत, पावरकॉम ने स्पीड पोस्ट से भेजने शुरू किए बिजली बिल दिलजीत दोसांझ की फिल्म ‘सतलुज’ विवाद हाईकोर्ट पहुंचा, OTT से हटाने के फैसले को चुनौती पंजाब सरकार का बड़ा कदम, FDDI से समझौते के जरिए फुटवियर और खेल उद्योग को मिलेगा नया बढ़ावा जंडियाला गुरु में 509 मेधावी विद्यार्थियों का सम्मान, हरभजन सिंह ETO ने बढ़ाया हौसला कपूरथला नगर निगम पर AAP का कब्जा, मेयर समेत तीनों प्रमुख पदों पर जीत

गैंगस्टरों पर AI से नकेल कसेगी पंजाब पुलिस, एक क्लिक में खुलेगी अपराधियों की कुंडली

April 17, 2026By Short Daily News

भगवंत मान सरकार ने संगठित अपराध पर अपनी कार्रवाई को और तेज करने के लिए  इंडियन इंस्टिट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी रोपड़ के साथ साझेदारी कर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस  आधारित पुलिसिंग सिस्टम लागू करने की दिशा में एक महत्त्वपूर्ण कदम उठाया है. इस पहल का उद्देश्य अपराधियों का एक संरचित डेटाबेस तैयार करना और ‘गैंग्सट्रां ते वार’ तथा ‘युद्ध नशेआं विरुद्ध’ जैसे अभियानों को मजबूत करना है, ताकि पंजाब और राज्य के बाहर सक्रिय गैंगस्टर नेटवर्क को ध्वस्त किया जा सके.

इस सहयोग के तहत, आईआईटी रोपड़ के साथ मिलकर राज्य सरकार एआई टूल्स का उपयोग करेगी; जिससे पंजाब पुलिस, अपराधियों के नेटवर्क को प्रभावी ढंग से मैप और टारगेट कर सकेगी. इस परियोजना के लिए डॉ. बी.आर. अंबेडकर स्टेट इंस्टिट्यूट ऑफ मेडिकल साइंस और आईआईटी रोपड़ के बीच समझौता ज्ञापन हस्ताक्षरित हुआ है. जहां एम्स मोहाली में स्थापित डेटा इंटेलिजेंस और तकनीकी सहायता, इकाई परियोजना को आगे बढ़ाने के लिए विभिन्न हितधारकों के बीच समन्वय करेगी.

इस साझेदारी के तहत आईआईटी रोपड़ उन्नत सॉफ्टवेयर विकसित करेगा; जिसमें डेटा एनालिटिक्स, आवाज़ पहचान तकनीक (वॉइस रिकग्निशन) और डैशबोर्ड-आधारित मॉनिटरिंग जैसी सुविधाएं होंगी. इससे रियल-टाइम ट्रैकिंग और इंटेलिजेंस-आधारित पुलिसिंग संभव होगी, जिससे विदेशों से संचालित गैंगस्टर नेटवर्क पर भी कार्रवाई की जा सकेगी.

यह पहल पंजाब पुलिस को एक व्यापक और एकीकृत अपराधी डेटाबेस बनाने में सक्षम बनाएगी, जिसमें संरचित और असंरचित दोनों प्रकार के डेटा को जोड़ा जाएगा. इसमें स्कैन किए गए पीडीएफ और हस्तलिखित रिकॉर्ड को डिजिटाइज़ कर एक ही प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध करवाया जाएगा, जिससे विखंडित (बिखरी हुई) जानकारी को तुरंत एक्सेस किया जा सकेगा.

 

भगवंत मान सरकार और आईआईटी रोपड़ मिलकर ,ट्रैकिंग और विश्लेषण के लिए तकनीकी सहायता प्रदान करेंगे;जिससे बिखरे हुए डेटा को एआई टूल्स, प्रेडिक्टिव मॉडल्स और एनालिटिकल डैशबोर्ड के माध्यम से उपयोगी जानकारी में बदला जा सकेगा. इससे निर्णय लेने की प्रक्रिया तेज  और अधिक प्रभावी होगी.

राज्य सरकार ने आधुनिक पुलिसिंग में डेटा के महत्त्व को दर्शाते हुए कहा कि जहां संरचित डेटा का विश्लेषण आसान होता है; वहीं पुलिस रिकॉर्ड का बड़ा हिस्सा असंरचित रूप में होता है, जैसे हस्तलिखित रिपोर्ट और स्कैन किए गए दस्तावेज. इनका एकीकरण न होने से जांच प्रक्रिया धीमी पड़ जाती है। यह परियोजना असंरचित रिकॉर्डस को रूपांतरित कर उन्हें मौजूदा डाटासेट्स के साथ एकीकृत प्रणाली में समाहित करके इस चुनौती का समाधान करती है, जिससे जांच की दक्षता में उल्लेखनीय वृद्धि होती है.

एक वरिष्ठ पंजाब पुलिस अधिकारी ने कहा, “आईआईटी रोपड़ के साथ यह सहयोग पुलिस बल की एआई और मशीन लर्निंग क्षमताओं को मजबूत करेगा. पुलिस कर्मी अपराध के पैटर्न की पहचान के लिए बेहतर रूप से लैस होंगे, जो ‘गैंग्सट्रां ते वार’ अभियान को और प्रभावी बनाएगा और अपराधियों द्वारा तकनीक के दुरुपयोग को रोकेगा.”

अधिकारी ने आगे कहा, “हमारा लक्ष्य अपराधियों से एक कदम आगे रहना और उनके नेटवर्क को निशाना बनाना है. गैंगस्टर विदेशों से ऑपरेट करते हैं और यहां के युवाओं को अपराध के लिए उकसाते हैं. यह सहयोग एआई के जरिए अपराधियों की ‘पहचान और रोकथाम’ को और मजबूत करेगा. यह पंजाब पुलिस को एक सुव्यवस्थित डेटाबेस स्थापित करने में मदद करेगा, जिससे अपराधियों और गैंगस्टरों से संबंधित जानकारी को व्यवस्थित रूप से संकलित किया जा सकेगा तथा एआई-आधारित उपकरणों की सहायता से उसका प्रभावी मूल्यांकन, पूछताछ और विश्लेषण किया जा सकेगा.” यह परियोजना संरचित और असंरचित डेटा स्रोतों के बीच की खाई को पाटने का भी लक्ष्य रखती है. इसके तहत एक ऐसी प्रणाली विकसित की जा रही है, जो असंरचित दस्तावेजों को अपने में शामिल कर उन्हें मौजूदा संरचित डाटासेट्स के साथ जोड़कर एकीकृत, सुव्यवस्थित डेटाबेस तैयार करेगी.

यह परियोजना अपराध की पहचान में तेज़ी लाने, आपराधिक नेटवर्क की निगरानी को मजबूत करने और डेटा-आधारित त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित करने में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाएगी, जिससे पंजाब में सार्वजनिक सुरक्षा को और मजबूत किया जा सकेगा.